शान्ति पर्व  अध्याय २५४

भीष्म उवाच

अद्रोहेणैव भूतानामल्पद्रोहेण वा पुनः |  ६   क
या वृत्तिः स परो धर्मस्तेन जीवामि जाजले ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति