menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आदि पर्व
अध्याय ५७
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
ततः सा जनय़ित्वा तौ विशस्ता मत्स्यघातिना |  ५३   क
सन्त्यज्य मत्स्यरूपं सा दिव्यं रूपमवाप्य च |  ५३   ख
सिद्धर्षिचारणपथं जगामाथ वराप्सराः ||  ५३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति