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वन पर्व
अध्याय २५४
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वैशम्पाय़न उवाच
तेषां ध्वजाग्राण्यभिवीक्ष्य राजा; स्वय़ं दुरात्मा कुरुपुङ्गवानाम् |  २   क
जय़द्रथो याज्ञसेनीमुवाच; रथे स्थितां भानुमतीं हतौजाः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति