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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ३४
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वासुदेव उवाच
ततस्तु तस्या व्राह्मण्या मतिः क्षेत्रज्ञसङ्क्षय़े |  १०   क
क्षेत्रज्ञादेव परतः क्षेत्रज्ञोऽन्यः प्रवर्तते ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति