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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
शङ्कमानाः फलं यज्ञे ये यजेरन्कथञ्चन |  १३   क
जाय़न्तेऽसाधवो धूर्ता लुव्धा वित्तप्रय़ोजनाः ||  १३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति