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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
विगुणं च पुनः कर्म ज्याय़ इत्यनुशुश्रुम |  १६   क
सर्वभूतोपघातश्च फलभावे च संय़मः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति