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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
क्षेत्रक्षेत्रज्ञतत्त्वज्ञाः स्वय़ज्ञपरिनिष्ठिताः |  १८   क
व्राह्मं वेदमधीय़न्तस्तोषय़न्त्यमरानपि ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति