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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
वनस्पतीनोषधीश्च फलमूलं च ते विदुः |  २५   क
न चैतानृत्विजो लुव्धा याजय़न्ति धनार्थिनः ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति