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शान्ति पर्व
अध्याय २५५
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तुलाधार उवाच
स्वमेव चार्थं कुर्वाणा यज्ञं चक्रुः पुनर्द्विजाः |  २६   क
परिनिष्ठितकर्माणः प्रजानुग्रहकाम्यया ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति