वन पर्व  अध्याय २५५

वैशम्पाय़न उवाच

स विनद्य महानादं गजः कङ्कणभूषणः |  २२   क
पतन्नवाक्षिरा भूमौ हस्त्यारोहानपोथय़त् ||  २२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति