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वन पर्व
अध्याय २५५
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वैशम्पाय़न उवाच
स तस्मिन्सङ्कुले सैन्ये द्रौपदीमवतार्य वै |  ३३   क
प्राणप्रेप्सुरुपाधावद्वनं येन नराधमः ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति