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वन पर्व
अध्याय २५५
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वैशम्पाय़न उवाच
हतप्रवीरा रिपवो भूय़िष्ठं विद्रुता दिशः |  ४०   क
गृहीत्वा द्रौपदीं राजन्निवर्ततु भवानितः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति