आदि पर्व  अध्याय ९६

वैशम्पाय़न उवाच

अथ काशिपतेर्भीष्मः कन्यास्तिस्रोऽप्सरःसमाः |  ३   क
शुश्राव सहिता राजन्वृण्वतीर्वै स्वय़ं वरम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति