menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २५५
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
सैन्धवस्तु हतान्दृष्ट्वा तथाश्वान्स्वान्सुदुःखितः |  ५६   क
दृष्ट्वा विक्रमकर्माणि कुर्वाणं च धनञ्जय़म् |  ५६   ख
पलाय़नकृतोत्साहः प्राद्रवद्येन वै वनम् ||  ५६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति