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वन पर्व
अध्याय २५५
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वैशम्पाय़न उवाच
पार्थः पञ्चशताञ्शूरान्पार्वतीय़ान्महारथान् |  ८   क
परीप्समानः सौवीरं जघान ध्वजिनीमुखे ||  ८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति