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शल्य पर्व
अध्याय ५४
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सञ्जय़ उवाच
वासुदेवस्य रामस्य तथा वैश्रवणस्य च |  २५   क
सदृशौ तौ महाराज मधुकैटभय़ोर्युधि ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति