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शान्ति पर्व
अध्याय २५८
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भीष्म उवाच
चिरकारी महाप्राज्ञो गौतमस्याभवत्सुतः |  ४   क
चिरं हि सर्वकार्याणि समेक्षावान्प्रपद्यते ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति