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शान्ति पर्व
अध्याय २५८
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भीष्म उवाच
सोऽव्रवीद्दुःखसन्तप्तो भृशमश्रूणि वर्तय़न् |  ४३   क
श्रुतधैर्यप्रसादेन पश्चात्तापमुपागतः ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति