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सभा पर्व
अध्याय ५८
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शकुनिरु उवाच
अस्ति वै ते प्रिय़ा देवी ग्लह एकोऽपराजितः |  ३१   क
पणस्व कृष्णां पाञ्चालीं तय़ात्मानं पुनर्जय़ ||  ३१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति