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शान्ति पर्व
अध्याय २५९
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द्युमत्सेन उवाच
राजानो लोकय़ात्रार्थं तप्यन्ते परमं तपः |  २४   क
अपत्रपन्ति तादृग्भ्यस्तथावृत्ता भवन्ति च ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति