शान्ति पर्व  अध्याय ८७

भीष्म उवाच

आश्रमेषु यथाकालं चेलभाजनभोजनम् |  २५   क
सदैवोपहरेद्राजा सत्कृत्यानवमन्य च ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति