आदि पर्व  अध्याय २६

सूत उवाच

भगवन्क्व विमुञ्चामि तरुशाखामिमामहम् |  १६   क
वर्जितं व्राह्मणैर्देशमाख्यातु भगवान्मम ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति