आदि पर्व  अध्याय २६

सूत उवाच

तां भग्नां स महाशाखां स्मय़न्समवलोकय़न् |  २   क
अथात्र लम्वतोऽपश्यद्वालखिल्यानधोमुखान् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति