आदि पर्व  अध्याय २६

सूत उवाच

ततस्तस्य गिरेः शृङ्गमास्थाय़ स खगोत्तमः |  २६   क
भक्षय़ामास गरुडस्तावुभौ गजकच्छपौ ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति