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स्त्री पर्व
अध्याय २६
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वैशम्पाय़न उवाच
वृहन्तं सोमदत्तं च सृञ्जय़ांश्च शताधिकान् |  ३३   क
राजानं क्षेमधन्वानं विराटद्रुपदौ तथा ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति