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शान्ति पर्व
अध्याय २६
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वैशम्पाय़न उवाच
यस्य वृत्तं नमस्यन्ति स्वर्गस्थस्यापि मानवाः |  ३६   क
पौरजानपदामात्याः स राजा राजसत्तमः ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति