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शान्ति पर्व
अध्याय ३७
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व्यास उवाच
अप्रेक्षापूर्वकरणादशुभानां शुभं फलम् |  १२   क
ऊर्ध्वं भवति सन्देहादिह दृष्टार्थमेव वा |  १२   ख
अप्रेक्षापूर्वकरणात्प्राय़श्चित्तं विधीय़ते ||  १२   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति