अनुशासन पर्व  अध्याय २६

अङ्गिरा उवाच

वैमानिक उपस्पृश्य किङ्किणीकाश्रमे तथा |  २१   क
निवासेऽप्सरसां दिव्ये कामचारी महीय़ते ||  २१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति