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शान्ति पर्व
अध्याय २११
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युधिष्ठिर उवाच
केन वृत्तेन वृत्तज्ञो जनको मिथिलाधिपः |  १   क
जगाम मोक्षं धर्मज्ञो भोगानुत्सृज्य मानुषान् ||  १   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति