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अनुशासन पर्व
अध्याय २६
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अङ्गिरा उवाच
मैनाके पर्वते स्नात्वा तथा सन्ध्यामुपास्य च |  ५६   क
कामं जित्वा च वै मासं सर्वमेधफलं लभेत् ||  ५६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति