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कर्ण पर्व
अध्याय २६
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सञ्जय़ उवाच
कल्याणवृत्तः सततं हि राज; न्वैचित्रवीर्यस्य सुतो ममासीत् |  ५५   क
तस्यार्थसिद्ध्यर्थमहं त्यजामि; प्रिय़ान्भोगान्दुस्त्यजं जीवितं च ||  ५५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति