कर्ण पर्व  अध्याय २६

सञ्जय़ उवाच

इदमपरमुपस्थितं पुन; स्तव निधनाय़ सुय़ुद्धमद्य वै |  ६९   क
यदि न रिपुभय़ात्पलाय़से; समरगतोऽद्य हतोऽसि सूतज ||  ६९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति