menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १९
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
अनिलेन यथाभ्राणि विच्छिन्नानि समन्ततः |  ३२   क
तथा पार्थस्य सैन्यानि विच्छिन्नानि क्वचित्क्वचित् ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति