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वन पर्व
अध्याय ८०
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पुलस्त्य उवाच
ऋषिभिः क्रतवः प्रोक्ता वेदेष्विह यथाक्रमम् |  ३४   क
फलं चैव यथातत्त्वं प्रेत्य चेह च सर्वशः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति