शान्ति पर्व  अध्याय २६०

कपिल उवाच

एवं विदित्वा सर्वार्थानारभेदिति वैदिकम् |  १५   क
नारभेदिति चान्यत्र नैष्ठिकी श्रूय़ते श्रुतिः ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति