menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय २६१
chevron_left
chevron_right
कपिल उवाच
नाक्षैर्दीव्येन्नाददीतान्यवित्तं; न वाय़ोनीय़स्य शृतं प्रगृह्णेत् |  २३   क
क्रुद्धो न चैव प्रहरेत धीमां; स्तथास्य तत्पाणिपादं सुगुप्तम् ||  २३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति