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शान्ति पर्व
अध्याय २६१
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कपिल उवाच
मोघान्यगुप्तद्वारस्य सर्वाण्येव भवन्त्युत |  २८   क
किं तस्य तपसा कार्यं किं यज्ञेन किमात्मना ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति