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शान्ति पर्व
अध्याय २६१
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कपिल उवाच
अभय़ं सर्वभूतेभ्यः सर्वेषामभय़ं यतः |  ३२   क
सर्वभूतात्मभूतो यस्तं देवा व्राह्मणं विदुः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति