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शान्ति पर्व
अध्याय २६१
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कपिल उवाच
सर्वं पावय़ते ज्ञानं यो ज्ञानं ह्यनुवर्तते |  ४६   क
ज्ञानादपेत्य या वृत्तिः सा विनाशय़ति प्रजाः ||  ४६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति