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शान्ति पर्व
अध्याय २६१
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कपिल उवाच
वैगुण्यमेव पश्यन्ति न गुणाननुय़ुञ्जते |  ५०   क
तेषां तमःशरीराणां तम एव पराय़णम् ||  ५०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति