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शान्ति पर्व
अध्याय २६१
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स्यूमरश्मिरु उवाच
सर्वमेतन्मय़ा व्रह्मञ्शास्त्रतः परिकीर्तितम् |  ५३   क
न ह्यविज्ञाय़ शात्रार्थं प्रवर्तन्ते प्रवृत्तय़ः ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति