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वन पर्व
अध्याय २६१
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मार्कण्डेय़ उवाच
सुभगा खलु कौसल्या यस्याः पुत्रोऽभिषेक्ष्यते |  १८   क
कुतो हि तव सौभाग्यं यस्याः पुत्रो न राज्यभाक् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति