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वन पर्व
अध्याय २६१
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मार्कण्डेय़ उवाच
कौसल्यां च सुमित्रां च कैकेय़ीं च सुदुःखितः |  ३५   क
अग्रे प्रस्थाप्य यानैः स शत्रुघ्नसहितो यय़ौ ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति