वन पर्व  अध्याय २६१

मार्कण्डेय़ उवाच

सत्कृत्य शरभङ्गं स दण्डकारण्यमाश्रितः |  ४०   क
नदीं गोदावरीं रम्यामाश्रित्य न्यवसत्तदा ||  ४०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति