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वन पर्व
अध्याय २६१
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मार्कण्डेय़ उवाच
ज्येष्ठो रामोऽभवत्तेषां रमय़ामास हि प्रजाः |  ६   क
मनोहरतय़ा धीमान्पितुर्हृदय़तोषणः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति