वन पर्व  अध्याय २६१

मार्कण्डेय़ उवाच

ततः स राजा मतिमान्मत्वात्मानं वय़ोऽधिकम् |  ७   क
मन्त्रय़ामास सचिवैर्धर्मज्ञैश्च पुरोहितैः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति