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शान्ति पर्व
अध्याय २६२
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कपिल उवाच
यद्यागच्छन्ति संसारं पुनर्योनिषु तादृशाः |  २४   क
न लिप्यन्ते पापकृत्यैः कदाचित्कर्मय़ोनितः ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति