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शान्ति पर्व
अध्याय २६२
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कपिल उवाच
एवं युक्तो व्राह्मणः स्यादन्यो व्राह्मणको भवेत् |  २५   क
कर्मैव पुरुषस्याह शुभं वा यदि वाशुभम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति