menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २६२
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
न ते प्रकृतिमान्वर्णः कच्चित्क्षेमं पुरे तव |  ३   क
कच्चित्प्रकृतय़ः सर्वा भजन्ते त्वां यथा पुरा ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति