menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २६२
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
किमिहागमने चापि कार्यं ते राक्षसेश्वर |  ४   क
कृतमित्येव तद्विद्धि यद्यपि स्यात्सुदुष्करम् ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति